Sanskrit
सं यज्जना॒न्क्रतु॑भिः॒ शूर॑ ई॒क्षय॒द्धने॑ हि॒ते त॑रुषन्त श्रव॒स्यवः॒ प्र य॑क्षन्त श्रव॒स्यवः॑ । तस्मा॒ आयुः॑ प्र॒जाव॒दिद्बाधे॑ अर्च॒न्त्योज॑सा । इन्द्र॑ ओ॒क्यं॑ दिधिषन्त धी॒तयो॑ दे॒वाँ अच्छा॒ न धी॒तयः॑ ॥ (५)
Hindi
बलशाली इंद्र यज्ञ के द्वारा सब मनुष्यों के विषय में सत्य बात जानते हैं. इसीलिए अन्न की अभिलाषा करने वाले यजमान पर्याप्त यज्ञ करते हैं. इंद्र के निमित्त दिया हुआ हव्य यजमान को पुत्र, सेवक आदि देता है, जिनकी सहायता से वह शत्रुओं को बाधा पहुंचाता है एवं इंद्र की पूजा करता है. यज्ञकर्म करने वाले यजमान इंद्रलोक प्राप्त करते हैं. इस प्रकार वे देवों के मध्य ही निवास करते हैं. (५)
English
Through the powerful Indra Yajna, all know the truth about human beings. That is why hosts who desire food perform enough yajna. The havya given for Indra gives sons, servants, etc. to the host, with the help of which he hinders the enemies and worships Indra. Hosts who perform yajnakarma receive Indraloka. Thus they reside only among the gods. (5)
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