Sanskrit
यो मि॒त्राय॒ वरु॑णा॒यावि॑ध॒ज्जनो॑ऽन॒र्वाणं॒ तं परि॑ पातो॒ अंह॑सो दा॒श्वांसं॒ मर्त॒मंह॑सः । तम॑र्य॒माभि र॑क्षत्यृजू॒यन्त॒मनु॑ व्र॒तम् । उ॒क्थैर्य ए॑नोः परि॒भूष॑ति व्र॒तं स्तोमै॑रा॒भूष॑ति व्र॒तम् ॥ (५)
Hindi
हे मित्र एवं वरुण! तुम अपनी सेवा करने वाले, द्वेषरहित एवं हव्यदाता यजमान की समस्त पापों से रक्षा करो. अर्यमा सरल स्वभाव वाले यजमान को देखते हैं एवं उसकी रक्षा करते हैं. यजमान मंत्र द्वारा मित्र और वरुण का यज्ञ करता है एवं स्तुतियों के द्वारा उसको सुशोभित करता है. (५)
English
Oh my friend and Varun! Protect the host who serves you, without malice, and the giver of all sins. Aryama sees and protects a simple-natured host. The host performs the yajna of the friend and Varuna by the mantra and adorns him with praises. (5)
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