Sanskrit

त्वे॒षमि॒त्था स॒मर॑णं॒ शिमी॑वतो॒रिन्द्रा॑विष्णू सुत॒पा वा॑मुरुष्यति । या मर्त्या॑य प्रतिधी॒यमा॑न॒मित्कृ॒शानो॒रस्तु॑रस॒नामु॑रु॒ष्यथः॑ ॥ (२)

Hindi

हे इष्टप्रद इंद्र व विष्णु! यज्ञ से बचे हुए सोमरस को पीने वाले यजमान तुम्हारे यज्ञस्थल पर तेजस्वी आगमन का आदर करते हैं. तुम दोनों यजमान के लिए यज्ञफल रूप में देने योग्य अन्न शत्रुपराजयकारी अग्नि से सदा दिलाते हो. (२)

English

O godly Indra and Vishnu! The hosts who drink the leftover somras from the yajna revere your glorious arrival at the place of yajna. Both of you always provide food for the host in the form of yajnaphal with the enemy's glorious fire. (2)