Sanskrit

द्वे इद॑स्य॒ क्रम॑णे स्व॒र्दृशो॑ऽभि॒ख्याय॒ मर्त्यो॑ भुरण्यति । तृ॒तीय॑मस्य॒ नकि॒रा द॑धर्षति॒ वय॑श्च॒न प॒तय॑न्तः पत॒त्रिणः॑ ॥ (५)

Hindi

मनुष्य विभूतियों का वर्णन करते हुए स्वर्गदर्शी विष्णु के दो चरणक्षेपों को ही प्राप्त करते हैं. उनके तीसरे पादक्षेप को मनुष्य क्या आकाश में उड़ने वाले पक्षी भी नहीं पा सकते. (५)

English

Man attains only the two steps of the heavenly Vishnu while describing the vibhutis. On their third footing, man cannot even find birds flying in the sky. (5)