Sanskrit
च॒तुर्भिः॑ सा॒कं न॑व॒तिं च॒ नाम॑भिश्च॒क्रं न वृ॒त्तं व्यती॑ँरवीविपत् । बृ॒हच्छ॑रीरो वि॒मिमा॑न॒ ऋक्व॑भि॒र्युवाकु॑मारः॒ प्रत्ये॑त्याह॒वम् ॥ (६)
Hindi
विष्णु ने अपनी विशेष गतियों द्वारा काल के चौरासी भागों को चक्र के समान गोलाकार में घुमा रखा है. वह विशाल शरीर वाले, विविध प्राणियों को विभक्त करने वाले, स्तुतिसंपन्न, तरुण एवं कौमार्यरहित हैं. वे युद्ध में गमन करते हैं. (६)
English
Vishnu, through his special motions, has rotated the eighty-four parts of time in a circle like a circle. He is a large-bodied, dividing diverse beings, praising, young and without virginity. They go to war. (6)
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