Sanskrit
उ॒त म॑न्ये पि॒तुर॒द्रुहो॒ मनो॑ मा॒तुर्महि॒ स्वत॑व॒स्तद्धवी॑मभिः । सु॒रेत॑सा पि॒तरा॒ भूम॑ चक्रतुरु॒रु प्र॒जाया॑ अ॒मृतं॒ वरी॑मभिः ॥ (२)
Hindi
मैं पुत्र के प्रति द्रोहहीन धरतीरूपी माता और आकाशरूपी पिता को आह्वान मंत्रों द्वारा अनुग्रहयुक्त मन वाला जानता हूं. ये दोनों माता-पिता अपने शोभन सामर्थ्य से यजमानों की विस्तृत रक्षा करते हुए पर्याप्त अमृत देते हैं. (२)
English
I know the earthly mother and the heavenly Father, who is hostile to the Son, with a gracious mind through the mantras invoking them. Both these parents give enough nectar while protecting the hosts with their virtuous power. (2)
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