Sanskrit
आ यद्दु॑व॒स्याद्दु॒वसे॒ न का॒रुर॒स्माञ्च॒क्रे मा॒न्यस्य॑ मे॒धा । ओ षु व॑र्त्त मरुतो॒ विप्र॒मच्छे॒मा ब्रह्मा॑णि जरि॒ता वो॑ अर्चत् ॥ (१४)
Hindi
“हे मरुतो! तुम्हारी सेवा करने में समर्थ स्तोत्र द्वारा माननीय यजमान की स्तुतिकुशल बुद्धि सेवा करने के लिए हमारे सामने आती है. इसलिए तुम मुझ मेधावी यजमान के सामने आओ. स्तोता तुम्हारे इन उत्तम कर्मो को लक्ष्य करके तुम्हारा आदर करता है. (१४)
English
"O Maruto! The skilled wisdom of the honorable host comes before us to serve you by a psalm capable of serving you. So you come before me the brilliant host. The Psalm honors you by aiming at these best deeds of yours. (14)
Shlok 1 of 1