Sanskrit

न मृषा॑ श्रा॒न्तं यदव॑न्ति दे॒वा विश्वा॒ इत्स्पृधो॑ अ॒भ्य॑श्नवाव । जया॒वेदत्र॑ श॒तनी॑थमा॒जिं यत्स॒म्यञ्चा॑ मिथु॒नाव॒भ्यजा॑व ॥ (३)

Hindi

अगस्त्य ने उत्तर दिया-“हे पत्नी! हम लोग व्यर्थ ही नहीं थके हैं. हमारी तपस्या से प्रसन्न देव हमारी रक्षा करते हैं. हम सभी भोगों को भोगने में समर्थ हैं. यदि हम और तुम इच्छा करें तो इस संसार में अब भी सुखसंभोग के सैकड़ों साधन प्राप्त कर सकते हैं. (३)

English

Agastya replied, "O wife! We're not tired of being in vain. God pleased with our penance protects us. We are able to enjoy all the indulgences. If we and you wish, we can still have hundreds of means of happiness in this world. (3)