Sanskrit

तमृ॒त्विया॒ उप॒ वाचः॑ सचन्ते॒ सर्गो॒ न यो दे॑वय॒तामस॑र्जि । बृह॒स्पतिः॒ स ह्यञ्जो॒ वरां॑सि॒ विभ्वाभ॑व॒त्समृ॒ते मा॑त॒रिश्वा॑ ॥ (२)

Hindi

वर्षा ऋतु संबंधी स्तुतियां जल की सृष्टि करने वाले एवं देवभक्त यजमानों को फल देने वाले बृहस्पति के समीप जाती हैं. वे आकाश रूपी व्यापी मातरिश्वा के समान सभी उत्तम फलों को उत्पन्न करके यज्ञ के निमित्त प्रकट करते हैं. (२)

English

Praises about the rainy season go close to Jupiter, who creates water and gives fruit to godly hosts. They produce all the best fruits like the sky-wide matrishva and manifest it for the sake of yajna. (2)