Sanskrit
यद्दे॒वानां॑ मित्रमहः पु॒रोहि॒तोऽन्त॑रो॒ यासि॑ दू॒त्य॑म् । सिन्धो॑रिव॒ प्रस्व॑नितास ऊ॒र्मयो॒ऽग्नेर्भ्रा॑जन्ते अ॒र्चयः॑ ॥ (१२)
Hindi
हे मित्रपूजक अग्नि! जब तुम यज्ञवेदी के पूर्व भाग में स्थापित होकर देवयज्ञ में वर्तमान रहते हुए उनका दूतकर्म करते हो, तब तुम्हारी लपटें उसी प्रकार चमकती हैं, जिस प्रकार गरजते हुए सागर की लहरें चमकती हैं. (१२)
English
O friend, agni! When you set up in the eastern part of the yajna vedi and do their messengers in the devayagna in the present, your flames shine in the same way as the waves of the roaring ocean shine. (12)
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