Sanskrit
तपु॑र्जम्भो॒ वन॒ आ वात॑चोदितो यू॒थे न सा॒ह्वाँ अव॑ वाति॒ वंस॑गः । अ॒भि॒व्रज॒न्नक्षि॑तं॒ पाज॑सा॒ रजः॑ स्था॒तुश्च॒रथं॑ भयते पत॒त्रिणः॑ ॥ (५)
Hindi
वायु द्वारा प्रेरित अग्नि शिखारूपी आयुध धारण कर लेता है तथा महान् तेज के कारण गीले वृक्षों के रस पर आक्रमण करके सर्वत्र व्याप्त होता हुआ प्राणियों को उसी प्रकार पराजित कर देता है, जिस प्रकार गायों के झुंड में सांड़ पहुंच जाता है. समस्त स्थावर एवं जंगम अग्नि से डरते हैं. (५)
English
The agni induced by the wind takes on the crestial armament and due to the great speed, attacks the juice of wet trees and defeats the animals that are everywhere, in the same way as the bull reaches the herd of cows. All are afraid of agni and agni. (5)
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