Sanskrit

ष॒ट्त्रिं॒शाँश्च॑ च॒तुरः॑ क॒ल्पय॑न्त॒श्छन्दां॑सि च॒ दध॑त आद्वाद॒शम् । य॒ज्ञं वि॒माय॑ क॒वयो॑ मनी॒ष ऋ॑क्सा॒माभ्यां॒ प्र रथं॑ वर्तयन्ति ॥ (६)

Hindi

विद्वान्‌ ब्राह्मण चालीस छंदों की कल्पना करते हुए बारह सोमपात्रों की स्थापना करते हैं. वे विद्वान्‌ अपनी बुद्धि से यज्ञ को पूरा करके ऋकू एवं सोम मंत्रों की सहायता से अपना यज्ञरूपी रथ चलाते हैं. (६)

English

The learned Brahmins establish twelve somapatras, imagining forty verses. Those scholars complete the yajna with their wisdom and run their yajnarupi rath with the help of Riku and Som mantras. (6)