Sanskrit

अर्चा॑मि वां॒ वर्धा॒यापो॑ घृतस्नू॒ द्यावा॑भूमी श‍ृणु॒तं रो॑दसी मे । अहा॒ यद्द्यावोऽसु॑नीति॒मय॒न्मध्वा॑ नो॒ अत्र॑ पि॒तरा॑ शिशीताम् ॥ (४)

Hindi

हे अग्नि! तुम मेरे यज्ञकर्म को बढ़ाओ. हे वर्षा का जल उत्पन्न करने वाले द्यावा-पृथिवी! तुम मेरी स्तुति सुनो. स्तोता जिस समय यज्ञस्तुति करते हैं, उस समय तुम वर्षा करके सबको शुद्ध करो. (४)

English

O agni! You increase my yajnakarma. These rain-water producers are the earth-earth! You listen to my praise. At the time when the Psalms perform yajnasuti, you should purify everyone by raining. (4)