Sanskrit

अग्नि॑ष्वात्ताः पितर॒ एह ग॑च्छत॒ सदः॑सदः सदत सुप्रणीतयः । अ॒त्ता ह॒वींषि॒ प्रय॑तानि ब॒र्हिष्यथा॑ र॒यिं सर्व॑वीरं दधातन ॥ (११)

Hindi

हे अग्निष्वात्त नामक पितरो! यहां आओ और स्वागत स्वीकार करके अपने-अपने आसनों पर बैठो एवं कुशों पर फैले हुए हव्यों को खाओ. इसके बाद हमें पुत्र-पौत्रों से युक्त धन दो. (११)

English

O pitro, called Agnishwat! Come here and accept the welcome, sit on your own asanas and eat the havyas spread over the kushas. After that, give us money with sons and grandsons. (11)