Sanskrit

सर॑स्वतीं॒ यां पि॒तरो॒ हव॑न्ते दक्षि॒णा य॒ज्ञम॑भि॒नक्ष॑माणाः । स॒ह॒स्रा॒र्घमि॒ळो अत्र॑ भा॒गं रा॒यस्पोषं॒ यज॑मानेषु धेहि ॥ (९)

Hindi

हे सरस्वती! पितर लोग दक्षिण की ओर आकर एवं यज्ञ में इधर-उधर चलते हुए तुम्हें बुलाते हैं. तुम इस यज्ञ में यजमान के लिए अनेक जनों द्वारा पूजनीय अन्न एवं धन का भाग दो. (९)

English

O Saraswati! The fathers call you by coming to the south and walking around in the yagna. You give a share of food and wealth worshipped by many people for the host in this yajna. (9)