Sanskrit

अ॒स्य यामा॑सो बृह॒तो न व॒ग्नूनिन्धा॑ना अ॒ग्नेः सख्युः॑ शि॒वस्य॑ । ईड्य॑स्य॒ वृष्णो॑ बृह॒तः स्वासो॒ भामा॑सो॒ याम॑न्न॒क्तव॑श्चिकित्रे ॥ (४)

Hindi

महान्‌ अग्नि की दीप्तियुक्त किरणें स्तुतिकर्ताओं को बाधा नहीं पहुंचातीं सखा, कल्याणकर्तता, स्तुतिमय, अभिलाषापूरक, महान्‌ एवं शोभन मुख वाले अग्नि की किरणें तीक्ष्ण होकर तप्त करने के लिए देवों के पास जाती हैं एवं प्रसिद्ध होती हैं. (४)

English

The radiant rays of the great agni do not hinder the praiseors. The rays of the agni with sakha, kalyankarta, praiseworthy, desireful, great and adornment-faced agni go to the gods and are famous to heat up in sharp. (4)