Sanskrit
स॒म्राजो॒ ये सु॒वृधो॑ य॒ज्ञमा॑य॒युरप॑रिह्वृता दधि॒रे दि॒वि क्षय॑म् । ताँ आ वि॑वास॒ नम॑सा सुवृ॒क्तिभि॑र्म॒हो आ॑दि॒त्याँ अदि॑तिं स्व॒स्तये॑ ॥ (५)
Hindi
अपने तेज से भली-भांति सुशोभित एवं भली प्रकार उन्नत जो देव यज्ञ में आते हैं एवं किसी के द्वारा भी अहिंसित होकर स्वर्ग में रहते हैं, उन महान् देवों और अदिति की सेवा कल्याण के निमित्त नमस्कार एवं शोभन स्तुतियों द्वारा करो. (५)
English
Serve those great gods and Goddesses and Aditi who are well-groomed and well-advanced with your swiftness and live in heaven without any one, for the welfare of those great gods and Aditi. (5)
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