Sanskrit

आ व॑ ऋञ्जस ऊ॒र्जां व्यु॑ष्टि॒ष्विन्द्रं॑ म॒रुतो॒ रोद॑सी अनक्तन । उ॒भे यथा॑ नो॒ अह॑नी सचा॒भुवा॒ सदः॑सदो वरिव॒स्यात॑ उ॒द्भिदा॑ ॥ (१)

Hindi

हे पत्थरो! अन्न वाली उषा के आते ही मैं तुम्हें भली प्रकार तैयार करता हूं. तुम सोमरस दवारा इंद्र, मरुत्‌ और द्यावा-पृथिवी को प्रसन्न करी. ये देव हम में से प्रत्येक के घर जाकर सेवा ग्रहण करें एवं घर को धन से पूर्ण कर दें. (१)

English

O stones! As soon as usha comes with food, I prepare you well. You pleased Indra, Marut and Dyava-Prithvivi by somras. May this God go to each of us's house and receive service and complete the house with money. (1)