Sanskrit
यत्पुरु॑षेण ह॒विषा॑ दे॒वा य॒ज्ञमत॑न्वत । व॒स॒न्तो अ॑स्यासी॒दाज्यं॑ ग्री॒ष्म इ॒ध्मः श॒रद्ध॒विः ॥ (६)
Hindi
जब पुरुषरूप काल्पनिक हवि से देवों ने यज्ञ का विस्तार किया, उस समय वसंत ऋतु को घी, ग्रीष्म को काष्ठ तथा शरद् ऋतु को हवि बनाया. (६)
English
When the devas expanded the yajna with the purusha form of fantasy, at that time the spring became ghee, summer as wood and the autumn as havi. (6)
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