Sanskrit

य॒ज्ञेन॑ गा॒तुम॒प्तुरो॑ विविद्रिरे॒ धियो॑ हिन्वा॒ना उ॒शिजो॑ मनी॒षिणः॑ । अ॒भि॒स्वरा॑ नि॒षदा॒ गा अ॑व॒स्यव॒ इन्द्रे॑ हिन्वा॒ना द्रवि॑णान्याशत ॥ (५)

Hindi

इंद्र की स्तुतियां करने वाले एवं इंद्र के अभिलाषी मनीषी अंगिरागोत्रियों ने जल को प्रेरणा देने वाले इंद्र से यज्ञ के द्वारा चुराई हुई गायों का मार्ग जाना. इसके पश्चात्‌ इंद्र के द्वारा रक्षा प्राप्त करने के इच्छुक स्तोताओं ने स्तोत्रों एवं यज्ञं द्वारा गोरूप धन प्राप्त किया. (५)

English

The Manishi Angiragotris, who praised Indra and desired Indra, went to the path of the cows stolen by yajna from Indra, who inspired water. After this, the stoetas who wished to get protection through Indra received gorupa dhan through hymns and yajnas. (5)