Sanskrit
वन॒स्पति॑रवसृ॒जन्नुप॑ स्थाद॒ग्निर्ह॒विः सू॑दयाति॒ प्र धी॒भिः । त्रिधा॒ सम॑क्तं नयतु प्रजा॒नन्दे॒वेभ्यो॒ दैव्यः॑ शमि॒तोप॑ ह॒व्यम् ॥ (१०)
Hindi
हमारे कर्मो को जानने वाले वनस्पति रूप अग्नि समीप उपस्थित हैं. वे विशेष प्रकार के कर्मो से हव्य को ठीक से पकाते हैं. शमिता नामक दिव्य अग्नि हव्य को तीन प्रकार से भली- भांति शुद्ध जानकर देवों के समीप ले जावें. (१०)
English
The botanical forms that know our deeds are present near the agni. They cook the havya properly with special types of karmas. Let the divine agni called Shamita be taken close to the gods knowing that the divine agni is well purified in three ways. (10)
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