Sanskrit
अ॒ग्निं दे॒वासो॒ मानु॑षीषु वि॒क्षु प्रि॒यं धुः॑ क्षे॒ष्यन्तो॒ न मि॒त्रम् । स दी॑दयदुश॒तीरूर्म्या॒ आ द॒क्षाय्यो॒ यो दास्व॑ते॒ दम॒ आ ॥ (३)
Hindi
देवों ने स्वर्ग को जाते समय अपने प्रिय अग्नि को मनुष्यों के बीच मित्र के रूप में स्थित किया था. वे अग्नि हव्यदाता यजमान के घर में देवों द्वारा स्थापित होकर उसके कल्याण के लिए अपनी प्रिय रातों में प्रकाशयुक्त होते रहते हैं. (३)
English
The gods, on their way to heaven, had located their beloved agni as a friend among humans. They are installed by the gods in the house of the agni-giver host and keep on lighting up in their beloved nights for his welfare. (3)
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