Sanskrit

ब॒भ्रा॒णः सू॑नो सहसो॒ व्य॑द्यौ॒द्दधा॑नः शु॒क्रा र॑भ॒सा वपूं॑षि । श्चोत॑न्ति॒ धारा॒ मधु॑नो घृ॒तस्य॒ वृषा॒ यत्र॑ वावृ॒धे काव्ये॑न ॥ (८)

Hindi

हे बल के पुत्र अग्नि! तुम सबके द्वारा धारण किए जाकर भास्कर एवं वेग वाली किरणें धारण करते हुए प्रकाशित होते हो. अग्नि जिस समय स्तोत्र के कारण बढ़ते हैं, उस समय मीठे जल की धाराएं गिरती हैं. (८)

English

O son of strength, agni! You are all carried and illuminated by bhaskara and wearing the rays of velocity. At the time when the agni increases due to the hymn, the streams of freshwater fall. (8)