Sanskrit

प्र य आ॒रुः शि॑तिपृ॒ष्ठस्य॑ धा॒सेरा मा॒तरा॑ विविशुः स॒प्त वाणीः॑ । प॒रि॒क्षिता॑ पि॒तरा॒ सं च॑रेते॒ प्र स॑र्स्राते दी॒र्घमायुः॑ प्र॒यक्षे॑ ॥ (१)

Hindi

नीली पीठ वाले एवं सबके धारणकर्ता अग्नि की अत्यंत ऊपर उठने वाली किरणें माता-पितारूप धरती-आकाश एवं सातों नदियों में सभी ओर से प्रवेश करती हैं. माता- पितारूप धरती और आकाश भली-भांति विस्तृत हैं एवं अधिक मात्रा में यज्ञ करने के लिए अग्नि दीर्घ-आयुरूप अन्न देते हैं. (१)

English

The blue-headed and all-consuming, very high-rise rays of agni enter the earth-sky and the seven rivers from all sides as parents. The earth and sky as parents are well-expanded and the agni gives long-life-like food to perform a large amount of yajna. (1)