Sanskrit
त्वद॑ग्ने॒ काव्या॒ त्वन्म॑नी॒षास्त्वदु॒क्था जा॑यन्ते॒ राध्या॑नि । त्वदे॑ति॒ द्रवि॑णं वी॒रपे॑शा इ॒त्थाधि॑ये दा॒शुषे॒ मर्त्या॑य ॥ (३)
Hindi
हे अग्नि! हव्यवहन और देवों को बुलाने का काम, स्तुतिरूपी वचन एवं पूजा करने योग्य उक्थ तुम ही से उत्पन्न होते हैं. सत्यकर्म वाले एवं हव्य दान करने वाले यजमान के लिए विक्रांत रूप एवं धन तुमसे ही निकलता है. (३)
English
O agni! The act of calling on the gods, the words of praise and the worshipable uquth are born of you. For the host who does the right deeds and the charity, the vikrant form and wealth come out of you. (3)
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