Sanskrit
यस्त्वाम॑ग्न इ॒नध॑ते य॒तस्रु॒क्त्रिस्ते॒ अन्नं॑ कृ॒णव॒त्सस्मि॒न्नह॑न् । स सु द्यु॒म्नैर॒भ्य॑स्तु प्र॒सक्ष॒त्तव॒ क्रत्वा॑ जातवेदश्चिकि॒त्वान् ॥ (१)
Hindi
हे अग्नि! जो यजमान खुच उठाकर तुम्हें प्रज्वलित करता है एवं दिन में तीन बार तुम्हें हव्य अन्न देता है, हे जातवेद! वह तुम्हें संतुष्ट करने वाले ईधन आदि से बढ़ते हुए तुम्हारे तेज को जानता हुआ धन द्वारा शत्रुओं को पूरी तरह हरावे. (१)
English
O agni! The host who picks up the khuch and ignites you and gives you good food three times a day, O Jattaveda! He knows your speed, growing with the fuel etc. that satisfy you, and defeat the enemies completely by money. (1)
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