Sanskrit
यस्त्वा॑ दो॒षा य उ॒षसि॑ प्र॒शंसा॑त्प्रि॒यं वा॑ त्वा कृ॒णव॑ते ह॒विष्मा॑न् । अश्वो॒ न स्वे दम॒ आ हे॒म्यावा॒न्तमंह॑सः पीपरो दा॒श्वांस॑म् ॥ (८)
Hindi
हे अग्नि! जो पुरुष रात में या प्रातःकाल तुम्हारी स्तुति करता है अथवा हाथ में प्रिय हव्य लेकर तुम्हें प्रसन्न करता है, यज्ञशाला में सुनहरी काठी वाले घोड़े के समान घूमते हुए तुम दरिद्रता से उसे बचाओ. (८)
English
O agni! A man who praises you at night or in the morning or pleases you with a beloved havya in his hand, you can save him from poverty while walking around like a horse with a golden saddle in the yajnashala. (8)
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