Sanskrit
अप्र॑तीतो जयति॒ सं धना॑नि॒ प्रति॑जन्यान्यु॒त या सज॑न्या । अ॒व॒स्यवे॒ यो वरि॑वः कृ॒णोति॑ ब्र॒ह्मणे॒ राजा॒ तम॑वन्ति दे॒वाः ॥ (९)
Hindi
वह राजा बाधा के बिना शत्रुओं एवं अपनी प्रजाओं के धन पर अधिकार करके महान् बनता है एवं देव उसी की रक्षा करते हैं, जो धनहीन एवं रक्षा के इच्छुक ब्राह्मण को धन देता है. (९)
English
That king becomes great by taking possession of the wealth of enemies and his subjects without hindrance and Dev protects him, who gives money to the rich and willing brahmin. (9)
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