Sanskrit
ते रा॒या ते सु॒वीर्यैः॑ सस॒वांसो॒ वि शृ॑ण्विरे । ये अ॒ग्ना द॑धि॒रे दुवः॑ ॥ (६)
Hindi
जो यजमान अग्नि की सेवा करते हैं, वे अग्नि की सेवा से धन पाकर एवं प्रसिद्ध पुत्र- पौत्रादि द्वारा प्रसिद्ध बनते हैं. (६)
English
The hosts who serve the agni become famous by receiving money from the service of agni and by the famous son- grandson. (6)
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