Sanskrit

जु॒हु॒रे वि चि॒तय॒न्तोऽनि॑मिषं नृ॒म्णं पा॑न्ति । आ दृ॒ळ्हां पुरं॑ विविशुः ॥ (२)

Hindi

हे अग्नि! जो लोग तुम्हारे प्रभाव को जानते हुए सदा यज्ञ के लिए तुम्हें बुलाते हैं एवं बुलाकर स्तुतियों तथा हव्यों द्वारा तुम्हारे बल की रक्षा करते हैं, वे शत्रुओं की अगम्य नगरी में प्रवेश करते हैं. (२)

English

O agni! Those who, knowing your influence, always call you for the yagna and call and protect your strength by praises and sayings, enter the inaccessible city of enemies. (2)