Sanskrit

उ॒भे सु॑श्चन्द्र स॒र्पिषो॒ दर्वी॑ श्रीणीष आ॒सनि॑ । उ॒तो न॒ उत्पु॑पूर्या उ॒क्थेषु॑ शवसस्पत॒ इषं॑ स्तो॒तृभ्य॒ आ भ॑र ॥ (९)

Hindi

हे प्रसन्नरताकारक अग्नि! तुम अपने मुख में घी से भरे हुए दो चमस धारण करते हो. हे बल के पुत्र अग्नि! तुम यज्ञों में हम लोगों को सफल बनाओ. हे अग्नि! तुम स्तुतिकर्ताओं के लिए अन्न लाओ. (९)

English

O joyful agni! You wear two spoons filled with ghee in your mouth. O son of strength, agni! You make us successful in yajnas. O agni! You bring food for the praiseors. (9)