Sanskrit
मि॒त्रं न यं सुधि॑तं॒ भृग॑वो द॒धुर्वन॒स्पता॒वीड्य॑मू॒र्ध्वशो॑चिषम् । स त्वं सुप्री॑तो वी॒तह॑व्ये अद्भुत॒ प्रश॑स्तिभिर्महयसे दि॒वेदि॑वे ॥ (२)
Hindi
हे अरणिरूप काष्ठ में सुरक्षित, स्तुतियोग्य, ऊर्ध्वगामी ज्वालाओं वाले एवं विचित्र अग्नि! भृगु ने तुम्हें मित्र के समान अपने घर में स्थापित किया. उत्तम स्तुतियों द्वारा प्रतिदिन पूजा करने वाले भरद्वाज के प्रति तुम भली प्रकार प्रसन्न बनो. (२)
English
O safe, praiseworthy, upwelling flames and strange agni in the form of a forest wood! Bhrigu installed you in his house like a friend. Be well pleased with the bharadwaj who worships every day with the best of praises. (2)
Shlok 1 of 1