Sanskrit

पा॒व॒कया॒ यश्चि॒तय॑न्त्या कृ॒पा क्षाम॑न्रुरु॒च उ॒षसो॒ न भा॒नुना॑ । तूर्व॒न्न याम॒न्नेत॑शस्य॒ नू रण॒ आ यो घृ॒णे न त॑तृषा॒णो अ॒जरः॑ ॥ (५)

Hindi

जो अग्नि उषा के प्रकाश के समान पावक एवं ज्ञान कराने वाली दीप्ति से धरती पर विराजमान होते हैं एवं सूर्य के विरुद्ध संग्राम में एतश ऋषि की रक्षा जिन्होंने शत्रुहिंसक वीर के समान की थी, हे भरद्वाज! ऐसे सर्वभक्षक तथा सदायुवा अग्नि को तुम प्रसन्न करो. (५)

English

Those who sit on the earth with the glow of light and knowledge like the light of the agni usha, and in the struggle against the sun, the sage who protected the sage who was like a brave enemy, O Bharadwaj! Please such an all-eater and ever-inspiring agni. (5)