Sanskrit

त्वाम॑ग्ने॒ पुष्क॑रा॒दध्यथ॑र्वा॒ निर॑मन्थत । मू॒र्ध्नो विश्व॑स्य वा॒घतः॑ ॥ (१३)

Hindi

हे अग्नि! शीश के समान सारे जगत्‌ को धारण करने वाले कमल पत्र पर अथर्वा ऋषि ने तुम्हारा मंथन किया था. (१३)

English

O agni! The sage Atharva had churned you on the lotus letter that holds the whole world like shisha. (13)