Sanskrit

वेषि॒ ह्य॑ध्वरीय॒तामग्ने॒ होता॒ दमे॑ वि॒शाम् । स॒मृधो॑ विश्पते कृणु जु॒षस्व॑ ह॒व्यम॑ङ्गिरः ॥ (१०)

Hindi

हे अग्नि! तुम यज्ञ की अभिलाषा करने वाले लोगों के घर में यज्ञ के होता के रूप में प्रवेश करते हो. हे प्रजापालक, हमें समृद्ध करो. हे अंगाररूप अग्नि! हमारा हव्य स्वीकार करो. (१०)

English

O agni! You enter the house of the people who desire the yajna as a form of yajna. O prajapalak, enrich us. O agni! Accept our speech. (10)