Sanskrit

अ॒वोरि॒त्था वां॑ छ॒र्दिषो॑ अ॒भिष्टौ॑ यु॒वोर्मि॑त्रावरुणा॒वस्कृ॑धोयु । अनु॒ यद्गावः॑ स्फु॒रानृ॑जि॒प्यं धृ॒ष्णुं यद्रणे॒ वृष॑णं यु॒नज॑न् ॥ (११)

Hindi

हे रक्षक मित्र और वरुण! जिस समय स्तुतियां बोली जाती हैं एवं यजमान यज्ञ में सरल-गति, शत्रु-पराभवकारी तथा कामवर्षी सोमरस को प्रस्तुत करते हैं, उस समय तुम घर देने के लिए आते हो और तुम्हारा दिया हुआ घर न्ट नहीं होता. (११)

English

O protector friend and Varun! At the time when the hymns are spoken and the hosts present the simple-motion, the enemy-the defeater and the kamvarshi somers in the yajna, at that time you come to give the house and your given house is not. (11)