Sanskrit

नाहं तन्तुं॒ न वि जा॑ना॒म्योतुं॒ न यं वय॑न्ति सम॒रेऽत॑मानाः । कस्य॑ स्वित्पु॒त्र इ॒ह वक्त्वा॑नि प॒रो व॑दा॒त्यव॑रेण पि॒त्रा ॥ (२)

Hindi

हम ताना-बाना नहीं जानते. लगातार प्रयत्न करके बुने गए कपड़े से भी हम परिचित नहीं हैं. इस लोक में रहने वाले पिता का उपदेश सुनने वाला पुत्र दूसरे लोक की बात कैसे कह सकता है? (२)

English

We don't know the fabric. We are also not familiar with the fabric woven by continuous effort. How can a son who listens to the teachings of the Father who lives in this world speak to another world? (2)