Sanskrit
ये राधां॑सि॒ दद॒त्यश्व्या॑ म॒घा कामे॑न॒ श्रव॑सो म॒हः । ताँ अंह॑सः पिपृहि प॒र्तृभि॒ष्ट्वं श॒तं पू॒र्भिर्य॑विष्ठ्य ॥ (१०)
Hindi
हे अतिशय युवा अग्नि! जो यजमान विशाल यश की कामना से सिद्ध करने वाले एवं अश्वरूप हव्य देते हैं, उन्हें पाप से बचाओ एवं रक्षासाधनरूपी सौ नगरियों द्वारा उनका पालन करो. (१०)
English
O very young agni! Those who prove the host with the desire for great glory and give ashwarup havya, save them from sin and follow them by a hundred cities of rakshasadhana. (10)
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