Sanskrit
धे॒नुं न त्वा॑ सू॒यव॑से॒ दुदु॑क्ष॒न्नुप॒ ब्रह्मा॑णि ससृजे॒ वसि॑ष्ठः । त्वामिन्मे॒ गोप॑तिं॒ विश्व॑ आ॒हा न॒ इन्द्रः॑ सुम॒तिं ग॒न्त्वच्छ॑ ॥ (४)
Hindi
हे इंद्र! जिस प्रकार उत्तम घास वाली गोशाला में गाय को दुहा जाता है, उसी प्रकार तुम्हें दुहने की इच्छा से वसिष्ठ ने स्तोत्ररूपी बछड़ा बनाया है. संसारभर तुम्हें ही गायों का स्वामी कहता है. तुम हमारी शोभनस्तुति के समीप आओ. (४)
English
O Indra! Just as a cow is milked in a goshala with good grass, vasishta has made a calf in the form of a hymn with the desire to milk you. The whole world calls you the master of cows. You come close to our adornment. (4)
Shlok 1 of 1