Sanskrit

अया॑मि॒ घोष॑ इन्द्र दे॒वजा॑मिरिर॒ज्यन्त॒ यच्छु॒रुधो॒ विवा॑चि । न॒हि स्वमायु॑श्चिकि॒ते जने॑षु॒ तानीदंहां॒स्यति॑ पर्ष्य॒स्मान् ॥ (२)

Hindi

हे इंद्र! जब ओषधियां बढ़ती हैं, तब देवों को प्रिय लगने वाले शब्द बोले जाते हैं. मानवों में कोई भी अपनी आयु नहीं जानता. तुम हमारे पापों को दूर करो. (२)

English

O Indra! When the herbs grow, the words that the gods love are spoken. No one among humans knows their age. You take away our sins. (2)