Sanskrit

न्यु॑ प्रि॒यो मनु॑षः सादि॒ होता॒ नास॑त्या॒ यो यज॑ते॒ वन्द॑ते च । अ॒श्नी॒तं मध्वो॑ अश्विना उपा॒क आ वां॑ वोचे वि॒दथे॑षु॒ प्रय॑स्वान् ॥ (२)

Hindi

हे अश्चिनीकुमारो! तुम्हारा प्रिय मनुष्य यहां बैठा है. जो तुम्हारा यज्ञ एवं वंदना करता है, उसके पास ठहरकर तुम उसका मधुर सोमरस पिओ, मैं अन्रयुक्त होकर तुम्हें बुलाता हूं. (२)

English

O aschinikumaro! Your beloved man is sitting here. Stay with him who performs your yajna and worship, and drink his sweet somarah, and I call you in peace. (2)