Sanskrit

येन॒ ज्योतीं॑ष्या॒यवे॒ मन॑वे च वि॒वेदि॑थ । म॒न्दा॒नो अ॒स्य ब॒र्हिषो॒ वि रा॑जसि ॥ (५)

Hindi

हे इंद्र! तुमने जिस मद के कारण आयु एवं मनु के हेतु प्रकाशपिंडों को दीप्त किया था, उसी मद से प्रसन्न होकर तुम इस विशाल यज्ञ के कर्ता के रूप में सुशोभित हो. (५)

English

O Indra! Pleased with the item for which you illuminated the light-bodies for age and Manu, you are adorned as the doer of this great yajna. (5)