Sanskrit

यो अ॒ग्निं ह॒व्यदा॑तिभि॒र्नमो॑भिर्वा सु॒दक्ष॑मा॒विवा॑सति । गि॒रा वा॑जि॒रशो॑चिषम् ॥ (१३)

Hindi

जो यजमान हव्य देकर एवं नमस्कारों द्वारा शोभन बलयुक्त अग्नि उपासना करता है अथवा स्तुतियों द्वारा गतिशील तेज वाले अग्नि की सेवा करता है वह समृद्धिशाली बनता है. (१३)

English

The host who worships a agni with a strong force by giving a greeting and greetings, or who serves the fast-paced agni through praises, becomes prosperous. (13)