Sanskrit

यून॑ ऊ॒ षु नवि॑ष्ठया॒ वृष्णः॑ पाव॒काँ अ॒भि सो॑भरे गि॒रा । गाय॒ गा इ॑व॒ चर्कृ॑षत् ॥ (१९)

Hindi

हे सौभरि ऋषि! तुम नित्य तरुण, वर्षाकारक एवं पवित्रकर्ता मरुतों की स्तुति अतिशय नवीन वावयों द्वारा उस सुंदर रूप से करो, जिस प्रकार किसान अपने बैलों की प्रशंसा करता है. (१९)

English

O hundred sages! Praise the eternal young, rain-fed and holy Maruts with the most innovative ways in the same beautiful way that the farmer praises his oxen. (19)