Sanskrit
यथा॑ गौ॒रो अ॒पा कृ॒तं तृष्य॒न्नेत्यवेरि॑णम् । आ॒पि॒त्वे नः॑ प्रपि॒त्वे तूय॒मा ग॑हि॒ कण्वे॑षु॒ सु सचा॒ पिब॑ ॥ (३)
Hindi
हे इंद्र! जैसे गौर मृग पानी के लिए प्यासा होने पर बिना घास वाले एवं जलपूर्ण स्थान पर आता है, उसी प्रकार हम कण्वगोत्रीय ऋषियों की मित्रता पाकर तुम शीघ्र आओ और हमारे साथ सोमरस पिओ. (३)
English
O Indra! Just as the gaur deer comes to a place without grass and water when thirsting for water, so we, having the friendship of the sages of the Kanvagotriyas, come quickly and drink somras with us. (3)
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