Sanskrit

अ॒हं हु॑वा॒न आ॒र्क्षे श्रु॒तर्व॑णि मद॒च्युति॑ । शर्धां॑सीव स्तुका॒विनां॑ मृ॒क्षा शी॒र्षा च॑तु॒र्णाम् ॥ (१३)

Hindi

मैं यज्ञदीक्षा के लिए बुलाए जाने पर शत्रुगर्वनाशक, ऋक्षपुत्र एवं श्रुतर्वा नामक राजाओं द्वारा दिए गए बालों वाले चार घोड़ों का शीश इस प्रकार स्पर्श करता हूं, जिस प्रकार लोग बालों को छूते हैं. (१३)

English

When I am called for yajnadiksha, I touch the shisha of four horses with hair given by the kings of Shatrugaramakta, Rikshputra and Shrutrva in such a way that people touch the hair. (13)