Sanskrit

अर॒मश्वा॑य गायति श्रु॒तक॑क्षो॒ अरं॒ गवे॑ । अर॒मिन्द्र॑स्य॒ धाम्ने॑ ॥ (२५)

Hindi

मैं श्रुतकक्ष ऋषि इंद्र से अश्व, गाएं एवं निवासस्थान पाने के लिए पर्याप्त स्तुति करता हुं. (२५)

English

I praise the shrutaksha sage Indra enough to get the horse, sing and abode. (25)