Sanskrit

यद्वां कक्षीवाँ उत यद्वयश्च ऋषिर्यद्वां दीर्घतमा जुहाव. पृथी यद्वां वैन्यः सादनेष्वेवेदतो अश्विना चेतयेथाम्‌.. (१०)

Hindi

हे अश्विनीकुमारो! जिस प्रकार तुम्हें कक्षीवान्‌, व्यश्च एवं दीर्घतमा ऋषियों एवं राजा वेन के पुत्र पृथु ने अपनी यज्ञशाला में बुलाया था, उसी प्रकार मैं भी तुम्हारी स्तुति कर रहा हूं. तुम इसे जानो. (१०)

English

O Ashwinikumaro! Just as you were called to his yagyashala by the sages of Kshavivan, the man and the long-term sages, and Prithu, the son of King Ven, so too am I praising you. You know it. (10)