Sanskrit

यन्नासत्या भुरण्यथो यद्वा देव भिषज्यथः. अयं वां वत्सो मतिभिर्न विन्धते हविष्मन्तं हि गच्छथः.. (६)

Hindi

हे सच्चे स्वभाव वाले एवं दिव्यगुणसंपन्न अश्विनीकुमारो! तुमने संसार का भरण किया है एवं सबको रोगरहित बनाया है. वत्सगोत्रीय ऋषि तुम्हे स्तुतियों द्वारा प्राप्त नहीं करते, तुम हवि धारण करने वालों के पास आते हो. (६)

English

O ashwinikumaro of true nature and divine qualities! You have filled the world and made everyone disease-free. The sages of Vatsagotriya do not receive you through praises, you come to those who possess the havis. (6)