Sanskrit

ऋध॑गि॒त्था स मर्त्यः॑ शश॒मे दे॒वता॑तये । यो नू॒नं मि॒त्रावरु॑णाव॒भिष्ट॑य आच॒क्रे ह॒व्यदा॑तये ॥ (१)

Hindi

जो मनुष्य यजमान की अभिलाषा पूर्ण करने के लिए मित्र व वरुण को अपने सामने करता है, वह इस प्रकार यज्ञ के लिए हवि तैयार करता है, यह सत्य है. (१)

English

The man who does the friend and Varuna in front of him to fulfill the desire of the host, thus prepares the havi for the yajna, it is true. (1)